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Wednesday, July 19, 2017



रात चाँद की बावरी,  पर्वत ऊपर मौन  , ,,
मुखड़ा देखे झील में, सपने बुनता पौन !!

शाम सुहानी मदिर है , नभ भी है कुछ ख़ास !
धीमी बहती पवन है ,     मन को भाता रास !!... ''तनु ''







बात बात पर बिखरना, ऐसे उनके ढंग !
निपट अकेले कक्ष में, संग रह गए संग !! 

जीवन ये नाटक नहीं,        सच्चाई से नाम ! 
इक दिन मुखड़ा धुल गया,बिगड़े सारे काम!! 

मोती थी किरचा बनी, खोया अपना ताब !

ज़ंग लगा लोहा हुई ,  लाय कहाँ से आब !!

रात चाँद की बावरी,  पर्वत ऊपर मौन  , ,,

मुखड़ा देखे झील में, सपने बुनता पौन !!

सही गलत के फेर में,  सच को सुनता कौन ! 

हर कोई अपनी कहे,        बातें धुनता मौन !!

अपने आप से लड़ते,   हार गये हर जंग ! 

आइना वही का वही ,    आप हुए बेरंग !!.... ''तनु ''

                           



लेखन के मंच पर ही  मचाते क्यों विवाद , ,,
अज्ञानी लड़ते हैं यहाँ, ज्ञानी मन अवसाद !

ज्ञान बड़ा है बोझ से,अहंकार है नीच , ,,
आसान सुलझना इसे,क्यों उलझे हम खीज !

व्यंग्य-बाण से वार है,  कह  कर आदरणीय !
चिकनी चुपड़ी ही सुनो,  घूँट जहर का पीय !!

नदिया से सागर बडा, होता रोज बखान , ,,
विनम्र बनकर ज्ञान लो,  दिखे नहीं अभिमान !

समुंदर में खार मिला, नदिया गुण की खान, ,, 
विनम्र बनकर ज्ञान लो,  दिखे नहीं अभिमान !!... ''तनु ''







की हर इक शजर सितम की नोक है , ,,,
सूरज ढकने पर किसने की रोक है !

आसमा धूम है धुँआ सा छा रहा ,,,,
उसे नहीं किसी को छुपाने की टोक है !

दिल जले हम साथ सबके क्यों चले , ,,,
झुक गयी नज़रें लगते डरपोक है !

देखकर रुख हवा का संभलते नहीं, ,, 
ओढ़ अँधेरे को लगाते धोक है !

आदतें अच्छी धीरे धीरे पनपती , ,,,
पत्थरो में देर से लगते ओक है !!

तनु समझना तुम्हारे बस में नहीं !
दृष्टि से बाहर भी अनजाने लोक हैं ..''तनु ''

Tuesday, July 18, 2017



सावण  में 


खूब चोखो सावन यो डट्यो देखो ;
धुल गया पात नीर ले पट्यो देखो !!

आज काल कर दन घणा वीत्या ;
वरस्यो नई बरस खट्यो देखो !!

आयो सावन सरस गई माटी ;
कण- कण यूँ गयो सट्यो देखो !!

गीत झूला रा गावे है कोई ;
दुखदर्द दिल से गयो कट्यो देखो !!

प्रीत है गोरी पीऊजी है बारे ;
सासरा पियर में प्यार बट्यो देखो !!

जाजम हरी, फ़ुहारां प्रीत री सोणी ;
चाँद नई आवे आज तो नट्यो देखो !!

मोर बोले पपीहो पीऊ बोले ;
वादरा रो कालजो फट्यो देखो !!... ''तनु ''




Monday, July 17, 2017

बदलाव आता नहीं कभी आदत ओ खुराफ़ात में ,
अंतर कुछ तो रहता है,---  जले दूध ओ छाछ में !
समझ गए आपसे तो दूर ही से नमस्ते अच्छी !!!
क्यों गले पड़ जाते हैं यूँ  ?? बेबात ओ बात में ,,,,,,,,,,''तनु '' 

Sunday, July 16, 2017






आयो  कने वणी ने प्यार दीजो सा !!
जग  री खुशियां उपहार दीजो सा !!

यूँ बाँधी ने हाथ उबा मति रिजो ! 
हाथां ने खोल जो दुलार दीजो सा !!

घणी जबर लागि या कपट री गाँठ ! 
आँटी राखो मन मति खार दीजो सा !!

नया रा साथ चालो जूना री वात मानो 
पुण्य पुरखाँ रा करज उतार दीजो सा 

अकड़ी ने आँख्यां थें मति दिखाजो !
निजरां भरी प्यार थें वार दीजो सा !!

खातर कणि जरा झुकी जावो तो कई !
जो जीत्या चालो वणाने हार दीजो सा !! 

 मोल कौड़ी जीवन कीमत नि अणि की !
बुरी  वातां भूलजो सदव्यवहार दीजो सा !!

काले आया ने काले चालता वणोगा !
ताबूत वो के सीढ़ी ''तनु''सिणगार दीजो सा !!,,,..''तनु''