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Saturday, October 12, 2019

गहरी जड़ें

 सरहदें हैं जहाँ नफ़रतें ही नफ़रतें वहाँ !
 पीठ छुरा भौकते ऐसी ही हरकतें वहाँ !!
 कांक्रीट के जंगल में दरख़्त ही ऐसे लगे, ,,
 बोन्साई हैं बेचारे इनकी गहरी जड़ें कहाँ !!... ''तनु''

  सरहदें हैं जहाँ नफ़रतें ही नफ़रतें वहाँ !
  पीठ छुरा भौकते ऐसी ही हरकतें वहाँ !!
  कांक्रीट के जंगल में बिन सायों के दरख़्त , ,,
  बिना पत्ती के ठूँठ उनकी गहरी जड़ें कहाँ !!... ''तनु''





पत्थर पर मैंने लिखी दास्तान तेरे लिए !


पत्थर पर मैंने लिखी दास्तान तेरे लिए !
मैं फिर बन गया हूँ आसमान तेरे लिए !!

कितनी हवाओं थपेड़ों से बचना है तुझे ! 
डूब जाय न तू ये बादबान तेरे लिए !!

देखता हूँ जिसे भी वही चश्मे-नम यहाँ !
पर मेरी इन खुशियों का दान तेरे लिए !!

मन मकीं है मेरा आ के बस जा यार अब !
पड़ा हुआ यहीं खाली मकान तेरे लिए !!

गाँव की जमीन जब रास आ गयी है तुझको !
क्यों बनाऊँ अब नगर में मचान तेरे लिए !!

जो कहता था कल तक, मैं वही सब कहूँगा !
बदलूँगा नहीं मैं ये बयान तेरे लिए !!

दस्तूर है बहारें तो आती ही रहेंगी !
इंतेज़ार में हैं मेज़बान तेरे लिए !!

आसमाँ सी ऊँचाई तू पा लेगा इक दिन !
यूँ भर रहे हैं परिन्दे उड़ान तेरे लिए !!

पलक पाँवड़े बिछाते आसमा ये धरती !
तो अब है नहीं ये पायदान तेरे लिए !!...   ''तनु''







मैं बियाबां को चमन बनाके रखूँगा !

मैं बियाबां को चमन बनाके रखूँगा !
मैं बुझते दीयों को जलाके रखूँगा !!  

तितली औ भँवरे बाग़ के महमान है!  
मैं दुआ दोस्तों की बचाके रखूँगा !!

कोई डाली नाराज़ न होने पाए !
इस बहाने गुलों को सजाके रखूँगा !!

बच्चों सा बहला, दिल नादाँ है मेरा ! 
मैं काग़ज़ की कश्ती बनाके रखूँगा !!

फिसलन बहुत और मैं फिसलूँगा जाना ! 
अब कदम मैं बहुत आज़मा के रखूँगा !!

पढ़ लेते निगाहें ये जमाने वाले !
सभी मन के ज़ज़्बात छुपाके रखूँगा !!

अभी वक्त के मारों की राहें मुझ तक !
मैं आँगन से दर को हटाके रखूँगा !!

मैं इंसा न होता,  क्या पता क्या होता ! 
हुजूरे-ख़ास में सर को झुकाके रखूँगा !!... ''तनु''

Friday, October 11, 2019

लगन कच्ची मिट्टी से लगाना है जरुरी !

लगन कच्ची मिट्टी से लगाना है जरुरी !
सभी के लिए  घरोंदे बनाना है जरुरी !!

जिंदगी में आये तो रोते क्यों रहेंगे !
हँसने के भी बहाने सिखाना है जरुरी !!

खाली हो जेब तो कुछ भी नहीं हो सकता !
भरने को पेट कुछ तो कमाना है जरुरी !!

तू है दीया हवा से लड़ना ही पड़ेगा !
झूठी बात से पर्दे  उठाना है जरुरी !!

मैंने तेरे लिए है नव सूरज उगाया !
तुझे इन अंधेरों को भगाना है जरुरी !!

सागर में सफीनो को चलाने से पहले !
काग़ज़ की नाव मिह में चलाना है जरुरी !!

जिंदगी मौत में जीत किसकी कौन जाने ?
जीने के ''तनु''अंदाज़ सिखाना है जरुरी !!... ''तनु''

Thursday, October 10, 2019

बहुत चले अभी रुको तुम

ओ मेरी आशा और विश्वास के साथी 
ये है मंज़िल तुम्हारी !

बहुत चले अभी रुको तुम ,
ग़म में जले अभी बुझो तुम !
ज़िन्दगी की राह प्यारी अब नहीं संघर्ष भारी !!

हुए गरल के खाली प्याले,
निगले कितने सूखे निवाले ! 
तुम्हारी परख की आ गयी है आज बारी !!

तूफ़ान देखो शांत हो गया,
सबसे बड़ा इंसान हो गया !
पल में जिसने मिटा दी दुखों की सृष्टि सारी !!

मत कभी विश्वास तोड़ो,
बोलता इतिहास पढ़ लो !
मन की कर न पाया हो कोई भी विध्वंसकारी !!... ''तनु''

Tuesday, October 8, 2019

बसंत बीच अटकी साँस ले

बसंत बीच अटकी साँस ले मुरझा रही है ज़िन्दगी !
काया हड्डियों की बन सिकुड़ती जा रही है ज़िन्दगी !!
बिखरे विनाश और दुख के बीच कहाँ ठिकाना पाऊँ , ,,
प्राणों का गीत अधूरा गह गह  गा रही है ज़िन्दगी !!... ''तनु''

जीवन की छोटी छोटी खुशियों से !


जीवन की छोटी छोटी खुशियों से !
कितने स्नेह-समुन्दर लहराए हैं !!

माटी  के इन नन्हे नन्हे दीपों से !
सारे भवन जगमग जगमगाए हैं !!

अंधियारी अमा की रजनी न्यारी !
दीपक झलमल ज्योति झिलमिलाये है !!

मन मरुथल में नव दीपक भावों के !
भाव प्रवण हो सब कुछ कह पाए हैं !! 

जलते कब तक अब ये क्षीण हो चले !
तारक-शशि, दीपक अब बन पाए हैं !!

चरण देख मुग्ध हुई काव्य वाटिका !
कविता के नव प्रसून खिलखिलाये हैं ! ... ''तनु''