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Tuesday, November 5, 2019

कहना प्रीत निभानी है

कहना प्रीत निभानी है !
मेरी ये मनमानी है !!

तुझे देख के जी लूँगी !

इसमें क्या हैरानी है !!

एक प्यार है इक हैं हम !

बात यही पुरानी है !!

कितनी बातें कितने ख़त !

अपनी यही कहानी है !!

हँसता हँसता जीवन है !

मौजों मौज रवानी है !!

चाँद खिले तारे चमके !

दिन दूना असमानी है !!

तुम आओ रात हँसेगी !

आँखें रोज़ बिछानी हैं !!

रंग हीना का बढ़ेगा ! 
इतनी सरल कहानी है !!

और कभी समझ न आये !
सहज सरल आसानी है !! ...... ''तनु''

Monday, November 4, 2019

लहू के शोर की सुनाई नहीं है



लहू के शोर की सुनाई नहीं है !
तुझे  इंसानियत आई नहीं है !!

अक़्ल तेरी  हुई पत्थर, सही है !
यहाँ तूने ही फतह पाई नहीं है !!

हँसे वो तो, हँसे तू भी, ख़ूब है !
सुन उसकी बात में सच्चाई नहीं है !!

हवा का शोर तेरी उलझने है !
अभी तूफ़ान है, अँगड़ाई नहीं है !!

गिराये आशियाने बंदगी के !
नहीं ऐसी नीयत कमाई नहीं है !!

है तेरे पास ही सारी ख़ुदाई !
क्या आवाज तुझ तक आई नहीं है !!

करूँ क्या समझ कर नासमझ तू है !
सभी इंसा आपस में भाई नहीं है !!

ना आये साँस शमशीरों के साये में !
हैं रावण कोई भी साँई नहीं है !!

कभी तो तजुरबों से काम ले ले ! 
हटा लेना नज़र भलाई नहीं है !!... ''तनु''

Sunday, November 3, 2019

साँच कहना चाहिए अब !

साँच कहना चाहिए अब !
झूठ  डरना  चाहिए अब !!

रात काली बीत जाये !

दिन निकलना चाहिए अब !!

आँसुओं से प्यास बढ़ती !
प्रेम घट घट चाहिए अब !!

आग आग से नहीं बुझेगी !

दरिया बहना चाहिए अब !!

हो गयी गहरी दरारें !
घाव भरना चाहिए अब !!

दिल में अपने प्यार का इक !

दीप जलना चाहिए अब !!

नींद तजकर जागिये भी !

खुद संभलना चाहिए अब !!

एक ठहरा ताल बन कर !

नहीं ठिठकना चाहिए अब !!

ये ज़माना नया ज़माना !
साथ चलना चाहिए अब !!

साजिशों के जाल बुन मत !

तुझे रुकना चाहिए अब !! .... "तनु"

Friday, November 1, 2019

बुतक़दे में क्यों सजाते हम हैं पत्थर ;
फिर दिलों को क्यों बनाते हम हैं पत्थर !

हादसों ने जब बिगाड़ा जिंदगी को ;
चोट अपने ही लगाते कम हैं पत्थर !

बोलना सच इमान हर इंसान का ;
राह इंसानियत की हर दम हैं पत्थर !

खून कितने ही बहा कर चुप रहेगा ;
जाबजा पत्थर दिल ओ हमदम है पत्थर !

इक अनोखा रंग था इकरार का भी ;
मोम खुद को ही बनाता सनम है पत्थर !

एक रेले संग बह गयी है जिंदगी ;
रोक लेगा राह में ही वहम है पत्थर !

एक गुड़िया चुप रही कुछ बोलती ना ;
सुन फ़साना बहते आँसू नम हैं पत्थर !!... ''तनु''

Monday, October 21, 2019

इक लम्हा जिंदगी का निशाँ हुआ !

इक लम्हा जिंदगी का निशाँ हुआ !
मेरा ये दिल लगता आस्माँ हुआ !!

दरख्तों पर आ गए परिंदे कुछ !
सबने देखा सुंदर आशियाँ हुआ !!

रखिये सलामत घर की दीवारें !
इन्ही के कारण ये सायबाँ हुआ !!

प्यार से रहिये घर और बाहर !
जुड़कर चलते तभी कारवाँ हुआ !!

प्यार को प्यार से सँवारोगे तो !
तारे उतरें आसमा जहां हुआ !!

खुशियों की बहार आई सुनिये !
कलियाँ हँस रही यही बयाँ हुआ !!

तन्हाइयाँ रूठें तो रूठ जाने दो !
ये जलवा जाने अभी यहाँ हुआ !!... ''तनु''

Sunday, October 13, 2019

चाँद आने तलक सजा मुझको !

चाँद आने तलक सजा मुझको ! 
बहुत खूबसूरत हूँ बता मुझको!!

अक्स कोई सज़ा है या ईनाम !
आइना दे रहा कज़ा मुझको !!

साथ तेरा मुझे गवारा है !
दर्द दे और दे दवा मुझको !!

चाँद की आदत घटना बढ़ना !
बारहा सोचना पड़ा मुझको !!

चाँदनी संग चाँद का जादू !
हर जगह प्यार ले गया मुझको !!         

चाँदनी चाँद से न रूठेगी !
समझते हैं सब तुझसा मुझको !!      

चाँदनी 'तनु' खिली खिली सी है !
शौक से अब बना खुदा मुझको !!... ''तनु"





Saturday, October 12, 2019

परेशान हैं क्या करें

बारिश और बाढ़ से परेशान हैं क्या करें !
बरसा रहा बाढ़ ये आसमान है क्या करें !!

डूब गए हैं नगर, है आयी बाढ़ शहर में !
अब शमशान बन गया हर मकान है क्या करें!!

परेशां हैं कीचड़ से और खुश्क है गला!
डूबा हुआ तन बदन दिलोजान है क्या करें!!

पक्के घरों ने रोका पानी के बहाव को !
खेतों रुका पानी बहे मचान हैं क्या करें !!

दर डूबा हुआ है दरीचा भी डूबा हुआ ! 
सहम गयी हवा डूबे हवादान है क्या करें!!

फूल कलियाँ टूटी सभी किलकारियाँ रूठी !
अब बाढ़ में लाचार बागबान है क्या करें!!

 बन कर के कहर बरसा अब जीना मुहाल है!
 हैरान हिन्दू और मुसलमान हैं क्या करें!!

बुत डूबते रहे औ' शिवाले भी डूब गए !
भगवान पानी पानी, इन्सान हैं क्या करें!!... 'तनु"