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Monday, August 10, 2015

प्रस्तुत है'विचार हमारे काव्य तुम्हारे' कार्यक्रम के अंतर्गत साप्ताहिक विचार;
'हम आज़ादी पाते हैं जब हम अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं'
:द्वारा रविंद्र नाथ टैगोर




मन स्वतंत्र को प्रभु के बंधन में रखिये ;
तन स्वतंत्र को समय के बंधन में रखिये ! 
भीड़ में  स्वतंत्र हो  बेकाबू ना रहिये;
''जन स्वतंत्र को ''सत्संग के बंधन में रखिये !!

आज़ादी का यह सपना साकार रखिये ;

अपनी सोच का कोई आधार रखिये !
वक्त बदलाव का भविष्य बनाने का है ;
आज़ाद !!! आज़ादी का अधिकार रखिये !!

करना हो कोई भला काम दूर न जाइए ;
अपने ही आसपास निगाह ले जाइए !
कीमत भले काम की होती नहीं कभी ;  
इंसान  संग जज़्बा है भूल न जाइए !!

चुनौतियों के साथ अजी खुद को बदलिए ;
जिंदादिली के साथ अपने बुत को बदलिए !
अतीत  जानना है हमारे विकास की दिशा ;
अतीत जान लिया है वर्तमान को बदलिए !!

जीवन का मूल्य जीवन ये जान जाइए ;
आज़ादी का मूल्य जीवन ये जान जाइए !
बेजा वक्त न गँवाइये यूँ मार पीट में ;
जवानों अमूल्य है जीवन ये जान जाइए !!.... तनुजा ''तनु ''



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