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Monday, August 3, 2015

आस की दौलत 

वाबस्ता है कहानियाँ तुमसे ?
लीजिये सुन ??? फिर दोहराई है !!

दूर मंदिर से कहाँ मिले भगवन ?
साथ चलती सदा परछाई है !!

मौन होकर साथ चल रहे हो ?
गुप -  चुप रस्मे वफ़ा निभाई है !!

टपकना बूँद का अंगारों पर ?
आज कैसी तिश्नगी छाई है !!

आस की दौलत लूट' क्या गम है ?
साथ अलहदा सजन साईं है !!

ग़म परिंदा जान अगर सकता ?
धूप सागर न सुखा' पाई है !!!

खो नहीं जाता सुबह का तारा ;
परबत पीछे छुपना ''राई'' है  !!!   … तनुजा ''तनु ''                        
                              

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