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Monday, August 31, 2015

 बटोही 

कोयल कुहुकी 
कहती है यहीं बजी
बाँसुरी श्याम की
कुञ्ज में फिरते शाम 
जो होती हमारी फ़िकर
आ जाते न 
कहीं नज़र ??
कहाँ हो निर्मोही , ,,
सूर के नयन 
रसखान की खान 
रैदास के दास 
भूले हो क्यों मोहे 
ओ मीरा के कन्हाई 
सखी बनाई जमुना को 
पूछा कदम्ब डाल को 
पूछा गोपिन ग्वाल को 
पूरी न होगी ये ऊनता 
कब तक भटकूँगा ??
मैं बन बटोही, …………तनुजा ''तनु''

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