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Thursday, April 19, 2018

ज्ञान पिपासा बावरी ,लखे नहीं दिन-रात !

ज्ञान पिपासा बावरी ,लखे नहीं दिन-रात !
मूरख अज्ञानी सहते, बात बात पर लात !!

रवि शशि की पोषित धरा, छाया काल नंत !
तम की चादर सो रहे,   कोटि कोटि विषदंत !!... ''तनु''

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